पटना : बिहार की राजनीति और कारोबारी जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और बिहार से पूर्व राज्यसभा सांसद रविंद्र किशोर सिन्हा (आरके सिन्हा) का शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नोएडा में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। ब्रेन स्ट्रोक के बाद उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी और वह लंबे समय तक कोमा में रहे थे।
नोएडा में निधन, पटना में होगा अंतिम दर्शन
मिली जानकारी के अनुसार, आरके सिन्हा का पार्थिव शरीर नोएडा से पटना लाया जाएगा। पटना के पाटलिपुत्र स्थित अन्नपूर्णा भवन में लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद भाजपा नेताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच शोक का माहौल है।
पत्रकारिता से शुरू किया था करियर
रविंद्र किशोर सिन्हा का जीवन संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों की मिसाल रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी। पत्रकार के रूप में उन्होंने अपराध और राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी युद्ध संवाददाता के रूप में की गई रिपोर्टिंग भी काफी चर्चित रही।
पत्रकारिता के बाद उन्होंने सामाजिक और कारोबारी क्षेत्र में कदम रखा।
230 रुपये से खड़ी की हजारों करोड़ की कंपनी
आरके सिन्हा ने वर्ष 1974 में पटना से Security and Intelligence Services (SIS) की स्थापना की थी। शुरुआती दौर में बेहद सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई यह कंपनी आगे चलकर देश की प्रमुख सिक्योरिटी और बिजनेस सर्विस कंपनियों में शामिल हो गई।
उनकी कारोबारी सफलता की कहानी देशभर में चर्चा का विषय रही। उन्होंने पूर्व सैनिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में काम शुरू किया था। धीरे-धीरे SIS ग्रुप ने सुरक्षा सेवाओं, कैश लॉजिस्टिक्स और फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई।
भाजपा के संस्थापक सदस्यों में थे शामिल
आरके सिन्हा भारतीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण पहचान रखते थे। वह जनसंघ से जुड़े रहे और भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। वर्ष 2014 में भाजपा की ओर से बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2020 तक सांसद रहे।
राजनीतिक जीवन में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का करीबी माना जाता था।
सामाजिक कार्यों में भी रहा योगदान
राजनीति और कारोबार के अलावा आरके सिन्हा सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में योगदान दिया।
आरके सिन्हा के निधन से बिहार ने पत्रकारिता, राजनीति, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शख्सियत को खो दिया है।
