पटना : बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अनंत सिंह को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। उन्हें अपना जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
दरअसल, जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनंत सिंह की विधायकी समाप्त करने की अनुशंसा की थी। पार्टी ने उन पर विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
जेडीयू ने सौंपे सबूत, सदस्यता रद्द करने की मांग
जेडीयू का आरोप है कि अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार किया था। इसके बजाय उन्होंने जन सुराज समर्थित प्रत्याशी अनुज सिंह का खुलकर समर्थन किया और उनके पक्ष में वोट मांगे थे।
इस मामले में जेडीयू की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को दस्तावेज, अखबारों की कटिंग और वीडियो सहित कई सबूत सौंपे गए हैं। पार्टी का कहना है कि अनंत सिंह ने पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की गई है।
स्पीकर बोले- दोनों पक्षों को सुनने के बाद होगा फैसला
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि जेडीयू की ओर से उन्हें आवेदन मिला है। मामले की समीक्षा की गई है और अनंत सिंह को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अनंत सिंह को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब देना होगा। उनके जवाब और जेडीयू की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। यदि अनंत सिंह निर्धारित समय में जवाब नहीं देते हैं, तो उसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे विचार किया जाएगा।
पहले ही छह साल के लिए पार्टी से हो चुके हैं निष्कासित
गौरतलब है कि 24 अक्टूबर को जेडीयू ने मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद 26 अक्टूबर को जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष को उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए औपचारिक पत्र और साक्ष्य सौंपे थे।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी बढ़ी मुश्किलें
अनंत सिंह की राजनीतिक मुश्किलों के बीच दुलारचंद यादव हत्याकांड का मामला भी चर्चा में है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।
फिलहाल अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त नहीं हुई है। अब सबकी नजरें उनके जवाब और विधानसभा अध्यक्ष के अगले फैसले पर टिकी हैं।
आगे क्या होगा? क्या अनंत सिंह अपना पक्ष रखकर विधायकी बचा पाएंगे या जेडीयू की शिकायत पर उनकी सदस्यता को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।
