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Bihar MLC Controversy: निर्दलीय MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी की सदस्यता पर संकट! मनोज झा बोले- सभापति से करेंगे अयोग्य घोषित करने की मांग

Bihar Politics: बिहार में दो नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान पार्षदों राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के भाजपा में शामिल होने को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। दोनों नेताओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधान परिषद चुनाव में जीत दर्ज की थी। अब उनकी भाजपा सदस्यता को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। राजद नेता मनोज झा ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए दोनों विधान पार्षदों को अयोग्य घोषित करने की मांग उठाई है।

मनोज झा का कहना है कि कोई भी उम्मीदवार यदि निर्दलीय चुनाव जीतकर सदन पहुंचता है और उसके बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता ग्रहण करता है, तो उसके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इस मामले में विधान परिषद के सभापति को हस्तक्षेप करना चाहिए।

दसवीं अनुसूची का दिया हवाला

मनोज झा ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दलीय निर्वाचित सदस्य यदि चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। उनके मुताबिक, निर्दलीय सदस्य सदन में किसी दल को समर्थन दे सकता है, लेकिन किसी राजनीतिक दल की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करने का मामला अलग है।

उन्होंने कहा कि वह विधान परिषद के सभापति से दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की अनुशंसा करेंगे। साथ ही, उन्हें भाजपा के विधानमंडल दल का सदस्य बनाए जाने पर भी सवाल उठाया।

तस्वीर दिखाकर भाजपा सदस्यता लेने का लगाया आरोप

मनोज झा ने इस मामले में दोनों नेताओं की भाजपा सदस्यता से जुड़ी तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से सामने आई तस्वीरों में दोनों सदस्य पार्टी की सदस्यता लेते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अलग-अलग बयान दिए गए और अब सदस्यता लेने की बात से इनकार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा नहीं की जानी चाहिए। इस मामले में मुख्यमंत्री और विधान परिषद सभापति को जल्द निर्णय लेना चाहिए।

चुनाव आयोग और कोर्ट तक जाने की चेतावनी

मनोज झा ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो विपक्ष चुनाव आयोग और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों सदस्यों की अयोग्यता के सवाल पर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई तो जनता की अदालत में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा।

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