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JLNMCH ब्लड बैंक में अब आधार और बायोमेट्रिक से होगी पहचान, 3 महीने से पहले दोबारा रक्तदान पर लगेगी रोक

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भागलपुर: जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH), मायागंज के ब्लड बैंक में रक्तदान की प्रक्रिया को और व्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। अब रक्तदान करने वाले लोगों की पहचान आधार और फिंगरप्रिंट के जरिए दर्ज की जाएगी। इसका उद्देश्य रक्तदाताओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना और तय समय से पहले दोबारा रक्तदान करने वालों की पहचान करना है।

आधार और फिंगरप्रिंट से दर्ज होगा डोनर का रिकॉर्ड

नई व्यवस्था के तहत रक्तदान करने वाले व्यक्ति की पहचान और रक्तदान से जुड़ी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी। बायोमेट्रिक पहचान से यह पता लगाना आसान होगा कि संबंधित व्यक्ति ने इससे पहले कब रक्तदान किया था।

इससे एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग पहचान के आधार पर बार-बार रक्तदान करने की संभावना को भी कम किया जा सकेगा।

तीन महीने से पहले दोबारा रक्तदान की होगी पहचान

ब्लड बैंक में अब डोनर का पिछला रिकॉर्ड आसानी से देखा जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित अंतराल पूरा होने से पहले दोबारा रक्तदान करने पहुंचता है, तो सिस्टम के जरिए उसकी पहचान की जा सकेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य रक्तदाताओं के बीच सुरक्षित रक्तदान के नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

ब्लड बैंक में रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया होगी बेहतर

नई डिजिटल व्यवस्था से रक्तदाताओं का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रहेगा। इससे ब्लड बैंक के कर्मचारियों को डोनर की पिछली जानकारी जांचने में आसानी होगी।

अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि इससे रक्त संग्रह की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और रक्तदान से जुड़े रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा।

क्यों जरूरी है यह व्यवस्था?

रक्तदान एक महत्वपूर्ण सामाजिक सेवा है, लेकिन इसके लिए निर्धारित स्वास्थ्य मानकों और अंतराल का पालन करना भी जरूरी होता है। नई व्यवस्था से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि कोई व्यक्ति तय अवधि से पहले दोबारा रक्तदान न करे।

साथ ही, डिजिटल और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से ब्लड बैंक में उपलब्ध डोनर डेटा को व्यवस्थित रखने में भी मदद मिलेगी।

ब्लड बैंक की व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम

JLNMCH में यह व्यवस्था ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आधार और बायोमेट्रिक पहचान के इस्तेमाल से डोनर की पहचान और पिछले रक्तदान का रिकॉर्ड जल्दी सत्यापित किया जा सकेगा।

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