पटना : बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PhD) में नामांकन की प्रक्रिया लगातार लंबी खिंचती जा रही है। अलग-अलग शैक्षणिक सत्रों के लिए आवेदन और प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई विश्वविद्यालयों में नामांकन एवं पंजीकरण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। इसके कारण पीएचडी करने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी नामांकन को लेकर नए नियमों और पुराने रेगुलेशन के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं होने से प्रक्रिया प्रभावित हुई है। कई विश्वविद्यालयों ने राजभवन से दिशा-निर्देश मांगे हैं, जबकि अभ्यर्थी लंबे समय से नामांकन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
नए पीएचडी रेगुलेशन से बढ़ी प्रक्रिया की उलझन
बिहार में पीएचडी नामांकन को लेकर वर्ष 2026 में नए अध्यादेश और रेगुलेशन लागू किए गए हैं। इसके तहत विश्वविद्यालयों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नामांकन प्रक्रिया संचालित करने का निर्देश दिया गया है। अब पीएचडी में प्रवेश के लिए यूजीसी नेट, जेआरएफ सहित निर्धारित पात्रता और चयन प्रक्रिया को आधार बनाया जा रहा है।
राजभवन की ओर से विश्वविद्यालयों को लंबित नामांकन प्रक्रिया जल्द पूरी करने और वर्ष 2024, 2025 तथा 2026 के नामांकन चक्र को नियमित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
भागलपुर विश्वविद्यालय में पंजीकरण का इंतजार
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में पैट-2023 के शोधार्थियों का पंजीकरण भी लंबित है। विश्वविद्यालय प्रशासन को पुराने और नए रेगुलेशन के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए लोकभवन से दिशा-निर्देश का इंतजार है।
शोधार्थियों का कहना है कि पहले से ही उनका शैक्षणिक सत्र काफी पीछे चल रहा है। पंजीकरण में देरी होने से आगे की शोध प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
अभ्यर्थियों की मांग, जल्द जारी हो स्पष्ट दिशा-निर्देश
पीएचडी अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नामांकन में लगातार देरी के कारण उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई अभ्यर्थी लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा में हैं।
अभ्यर्थियों की मांग है कि विश्वविद्यालय और राजभवन के बीच लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए। साथ ही नामांकन, पंजीकरण, साक्षात्कार और शोध कार्य शुरू करने की समयसीमा स्पष्ट की जाए, ताकि विद्यार्थियों को बार-बार अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
