मुजफ्फरपुर : तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में हार के बाद एनडीए के भीतर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के अभिषेक झा ने अपनी हार को राजनीतिक चक्रव्यूह से जोड़ते हुए भावुक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अपने ही राजनीतिक परिवार (NDA) के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में वह अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? वहीं, जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गठबंधन के कुछ नेताओं पर भीतरघात करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, रीगा के भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए एनडीए की एकजुटता का दावा किया है।
तिरहुत स्नातक एमएलसी चुनाव में अभिषेक झा की हार के बाद सामने आए इन बयानों ने गठबंधन के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देवेश चंद्र ठाकुर बोले- कुछ लोगों ने भीतरघात किया
जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एनडीए के कुछ सहयोगी दलों के नेताओं का हृदय साफ नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की व्यक्तिगत दुश्मनी अभिषेक झा से नहीं, बल्कि उनसे थी।
देवेश ठाकुर के मुताबिक, कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं थी कि एक कमजोर समाज से आने वाला व्यक्ति राजनीतिक रूप से इतना प्रभावशाली कैसे होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसे लोगों ने चुनाव में विरोधी भूमिका निभाई, जिन्होंने जीवनभर उनसे मदद ली थी।
हालांकि, सांसद ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी किसी सहयोगी दल के नेता या कार्यकर्ता से गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ काम करने अथवा वोट देने की अपील नहीं की।
बैद्यनाथ प्रसाद का पलटवार, बोले- NDA ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा
देवेश चंद्र ठाकुर के बयान पर रीगा के भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देवेश चंद्र ठाकुर के राजनीतिक कद के हिसाब से उनका यह बयान हल्का है। एनडीए ने पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा है और गठबंधन के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने मिलकर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में काम किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले एमएलसी चुनाव में अभिषेक झा को करीब 10 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार उन्हें लगभग 20 हजार वोट प्राप्त हुए हैं। यह एनडीए के नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
अभिषेक झा बोले- क्या अपने ही राजनीतिक परिवार में रचे गए चक्रव्यूह में फंस गया?
इस पूरे विवाद के बीच अभिषेक झा की सोशल मीडिया पोस्ट ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है। उन्होंने चुनाव में समर्थन देने वाले मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि भले ही परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन लोगों का स्नेह और विश्वास उनके लिए किसी ऐतिहासिक जीत से कम नहीं है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या अपने ही राजनीतिक परिवार यानी एनडीए के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में वह अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और आत्ममंथन का विषय बताया।
4700 मतपत्र अमान्य होने का दावा
अभिषेक झा ने चुनाव परिणाम को लेकर एक और महत्वपूर्ण दावा किया। उनके अनुसार, करीब 4700 मतपत्रों पर उनके नाम के सामने टिक का निशान होने के बावजूद उन्हें अमान्य घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि इन मतों को वैध माना जाता तो चुनाव का परिणाम अलग हो सकता था और उनके लिए जीत हासिल करना आसान होता।
हालांकि, अमान्य मतों और उनके दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक चुनावी आंकड़ों का सामने आना जरूरी है।







