भागलपुर : मशहूर रेशमी कपड़ों को अब देश-दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। स्थानीय रेशम उत्पादकों को बड़े खरीदारों से जोड़ने और उनके कारोबार को नई पहचान दिलाने के लिए मंगलवार को जीरो माइल स्थित रेशम भवन में भव्य बॉयर्स-सेलर्स मीट का आयोजन किया गया। जीविका और वूमेन वर्ल्ड बैंकिंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए खरीदारों और स्थानीय रेशम उत्पादकों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन उप विकास आयुक्त रवि राकेश ने किया। इस मौके पर जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, रेशम उद्यमी और महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य मौजूद रहीं।
बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति, सीधे खरीदारों तक पहुंचेगा रेशम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीडीसी रवि राकेश ने कहा कि तसर सिल्क भागलपुर की विशिष्ट पहचान और गौरव है। यहां के रेशमी कपड़ों की गुणवत्ता और पारंपरिक बुनाई कला की देश-दुनिया में अलग पहचान है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से स्थानीय उत्पादकों और बड़े खरीदारों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को अपने सामान का उचित मूल्य मिलने के साथ बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
महिला उद्यमियों ने लगाए रेशमी उत्पादों के स्टॉल
बॉयर्स-सेलर्स मीट में महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों ने अपने रेशमी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। जीविका से जुड़ी बीवी शबनम, प्रति कुमारी, अमृता कुमारी, फरजान और जूली कुमारी समेत कई महिला उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इसके अलावा पड़ोसी जिले बांका से आए रेशम उद्यमियों ने भी अपने उत्पादों और व्यावसायिक अनुभवों को साझा किया।
आधुनिक डिजाइन और बाजार की मांग पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए खरीदारों और स्थानीय उत्पादकों के बीच रेशमी वस्त्रों की गुणवत्ता, आधुनिक डिजाइन, कीमत, बाजार की मांग और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई। साथ ही भविष्य में कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें सीधे बड़े बाजारों से जोड़ना और उनके उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से भागलपुर के पारंपरिक रेशम उद्योग को नई ऊंचाई मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे तथा महिला उद्यमियों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।







